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| महादेवी वर्मा की जीवनी |
इन्होंने
नारी - स्वातन्त्र्य के लिए संघर्ष किया , परन्तु अपने
अधिकारों की रक्षा के लिए नारियों का शिक्षित होना भी आवश्यक बताया । कुछ वर्षों
तक ये उत्तर प्रदेश विधान परिषद् की मनोनीत सदस्या भी रहीं । भारत के राष्ट्रपति
से इन्होंने ' पद्मभूषण ' की उपाधि प्राप्त की । हिन्दी
साहित्य सम्मेलन की ओर से इन्हें ' सेकसरिया पुरस्कार ' तथा ' मंगलाप्रसाद पारितोषिक ' मिला । मई 1983 ई०
में '
भारत - भारती ' तथा नवम्बर 1983 ई० में यामा पर ' ज्ञानपीठ पुरस्कार से इन्हें सम्मानित किया गया । 11 सितम्बर , 1987 ई० ( संवत् 2044 वि० ) को इस महान् लेखिका का स्वर्गवास हो गया ।
साहित्यिक सेवाएँ- श्रीमती महादेवी वर्मा का
मुख्य रचना क्षेत्र काव्य है । इनकी गणना छायावादी कवियों की वृहत् चतुष्टयी (
प्रसाद ,
पन्त , निराला और महादेवी ) में होती है ।
इनके काव्य में वेदना की
प्रधानता है । काव्य के अतिरिक्त इनकी बहुत - सी श्रेष्ठ गद्य - रचनाएँ भी हैं । इन्होंने
प्रयाग में ' साहित्यकार संसद की स्थापना करके साहित्यकारों
का मार्गदर्शन भी किया । ' चाँद ' पत्रिका का सम्पादन
करके इन्होंने नारी को अपनी स्वतन्त्रता और अधिकारों के प्रति सजग किया है ।
महादेवी वर्मा जी के जीवन पर महात्मा गाँधी का तथा कला - साहित्य साधना पर
कवीन्द्र रवीन्द्र का प्रभाव पड़ा । इनका हृदय अत्यन्त करुणापूर्ण , संवेदनायुक्त एवं भावुक था । इसलिए इनके साहित्य में भी वेदना की गहरी टीस
है ।
रचनाएँ- महादेवी जी का प्रमुख कृतित्व इस प्रकार
है
1 . नीहार यह इनका प्रथम प्रकाशित काव्य - संग्रह है ।
2 . रश्मि इसमें आत्मा - परमात्मा विषयक आध्यात्मिक गीत है ।
3 . नीरजा इस संग्रह के गीतों में इनकी जीवन - दृष्टि का विकसित रूप -
दृष्टिगोचर होता है ।
4 . सान्थ्यगीत इसमें इनके शृंगारपरक गीतों को संकलित किया गया है ।
5 . दीपशिखा इसमें इनके रहस्य - भावना - प्रधान गीतों का संग्रह है ।
6 . ' यामा
' यह महादेवी जी के भाव - प्रधान गीतों का संग्रह है ।
इसके
अतिरिक्त ' सन्धिनी ' , ' आधुनिक
कवि ' तथा ' सप्तपर्णा ' इनके अन्य काव्य - संग्रह है । ' अतीत के चलचित्र '
, ' स्मृति की रेखाएँ ' , श्रृंखला की कड़ियाँ
इनकी महत्त्वपूर्ण गद्य रचनाएँ हैं ।
साहित्य में स्थान- निष्कर्ष रूप में महादेवी
जी वर्तमान हिन्दी कविता की सर्वश्रेष्ठ गीतकार हैं । इनके भावपक्ष और कलापक्ष
दोनों ही अतीव पुष्ट हैं । अपने साहित्यिक व्यक्तित्व एवं अद्वितीय कृतित्व के
आधार पर ,
हिन्दी साहित्याकाश में महादेवी जी का गरिमामय पद ध्रुव तारे की
भाँति अटल है ।

very nice post
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