रामधारी सिंह दिनकर biography

Biography In Hindi
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रामधारी सिंह दिनकर biography
रामधारी सिंह दिनकर biography
जीवन-परिचय-  श्री रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 30 सितम्बर , 1905 ई० ( संवत 1965 वि० ) को जिला मुंगेर ( बिहार ) के सिमरिया नामक ग्राम में हुआ था । इनके पिता का नाम श्री रवि सिंह और माता का नाम श्रीमती मनरूप देवी था । इनकी दो वर्ष की अवस्था में ही पिता का देहावसान हो गया । अत : बड़े भाई वसन्त सिंह और माता की छत्रछाया में ही ये बड़े हुए । इनकी आरम्भिक शिक्षा गॉव की पाठशाला में ही हुई । अपने विद्यार्थी जीवन से ही इन्हें आर्थिक कष्ट झेलने पड़े । विद्यालय के लिए घर से पैदल दस मील रोज आना - जाना इनकी विवशता थी ।
इन्होंने मैट्रिक ( हाईस्कल ) की परीक्षा मोकामा घाट स्थित रेलवे हाइस्कूल से उत्तीर्ण की और हिन्दी में सर्वाधिक अंक प्राप्त करके ' भूदेव स्वर्णपदक जीता । 1932 ई० में पटना से इन्होंने बी०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की । ग्रामीण परम्पराओं के कारण दिनकर जी का विवाह किशोरावस्था में ही हो गया । अपने पारिवारिक दायित्वों के प्रति दिनकर जी जीवन भर सचेत रहे और इसी कारण उन्हें कई प्रकार की नौकरी करनी पड़ी । सन् 1932 ई० में बी० ए० करने के बाद के एक नये स्कूल में अध्यापक बने । सन् 1934 ई० में इस पद को छोड़कर सीतामढ़ी में सब - रजिस्ट्रार बने । सन् 1950 ई० में बिहार सरकार ने इन्‍हें मुजफ्फरपुर के स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिन्दी - विभागाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया । सन् 1952 ई० से सन् 1963 ई० तक ये राज्यसभा के सदस्य मनोनीत किये गये ।
 इन्हें केन्द्रीय सरकार की हिन्दी - समिति का परामर्शदाता भी । बनाया गया । सन् 1964 ई० में ये भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति बने । दिनकर जी को कवि - रूप में पर्याप्त सम्मान मिला ।           ' पद्मभूषण ' की उपाधि, ' साहित्य अकादमी ' पुरस्कार द्विवेदी पदक डी०लिट० की मानद उपाधि , राज्यसभा की सदस्यता आदि इनके कृतित्व की राष्ट्र द्वारा स्वीकृति के प्रमाण हा सन् 1972 ई० में इन्हें उर्वशी के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार ' से भी सम्मानित किया गया । इनका स्वर्गवास 24 अप्रैल , 1974 ई० ( संवत् 2031 वि० ) का मद्रास ( चेन्नई ) में हुआ ।
साहित्यिक सेवाएँ-  दिनकर जी की सबसे प्रमुख विशेषता उनकी परिवर्तनकारी सोच रही है । उनकी कविता का उद्भव छायावाद युग में हुआ और वह प्रगतिवाद , प्रयोगवाद , नयी कविता आदि के युगों से होकर गुजरी । इस दीर्घकाल में जो आरम्भ से अन्त तक उनके काव्य में रही , वह है उनका राष्ट्रीय स्वर । ' दिनकर ' जी राष्ट्रीय भावनाओं के ओजस्वी गायक रहे हैं । इन्होंने देशानुराग की भावना से ओत - प्रोत , पीड़ितों के प्रति सहानुभूति की भावना से परिपूर्ण तथा क्रान्ति की भावना जगाने वाली रचनाएँ लिखी हैं । ये लोक के प्रति निष्ठावान , सामाजिक दायित्व के प्रति सजग तथा जनसाधारण के प्रति समर्पित कवि रहे हैं ।
कृतियाँ-  दिनकर जी का साहित्य विपुल है , जिसमें काव्य के अतिरिक्त विविध - विषयक गद्य - रचनाएँ भी है । इनकी प्रमुख काव्य - रचनाएँ निम्‍नलिखित है ।
रचनाएँ-
1 . रेणुका , 2 . हुंकार , 3 . कुरुक्षेत्र तथा 4 . उर्वशी है ।
 इनके अतिरिक्त दिनकर जी के अन्य काव्यग्रन्थ निम्नलिखित है
5 . खण्डकाव्य - रश्मिरथी ,
6 . कविता - संग्रह - ( i ) रसवन्ती , ( ii )  द्वन्द्वगीत . ( iii ) सामधेनी , ( iv ) बापू , ( v ) इतिहास के ऑसू , ( vi) धूप और धुआँ , ( vii ) नीम के पत्ते , ( viii ) नीलकुसम ( ix ) चक्रवाल , ( x ) कविश्री     ( xi ) सीपी और शंख ( xii ) परशुराम की प्रतीक्षा , ( xiii ) स्मृति - तिलक , ( xiv ) हारे को हरिनाम आदि ,
7 . बाल - साहित्य - धूप - छाँह , मिर्च का मजा , सूरज का ब्‍याह ।
साहित्य में स्थान- दिनकर जी की सबसे बड़ी विशेषता है , उनका समय के ' साथ निरन्तर गतिशील रहना । यह उनके क्रान्तिकारी व्यक्तित्व आर ज्वलन्त प्रतिभा का परिचायक है । फलत : गुप्त जी के बाद ये ही राष्ट्रकवि पदे के सच्चे अधिकारी बने और इन्हें ' युग - चरण ' , ' राष्ट्रीय - चेतना का वैतालिक ' और ' जन - जागरण का अग्रदूत ' जैसे विशेषणों से विभूषित किया गया । ये हिन्दी के गौरव हैं , जिन्हें पाकर सचमुच हिन्दी कविता धन्य हई ।

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