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| रामधारी सिंह दिनकर biography |
इन्होंने
मैट्रिक ( हाईस्कल ) की परीक्षा मोकामा घाट स्थित रेलवे हाइस्कूल से उत्तीर्ण की
और हिन्दी में सर्वाधिक अंक प्राप्त करके ' भूदेव
स्वर्णपदक जीता । 1932
ई० में पटना से इन्होंने बी०ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की । ग्रामीण परम्पराओं के
कारण दिनकर जी का विवाह किशोरावस्था में ही हो गया । अपने पारिवारिक दायित्वों के
प्रति दिनकर जी जीवन भर सचेत रहे और इसी कारण उन्हें कई प्रकार की नौकरी करनी पड़ी
। सन् 1932 ई० में
बी० ए० करने के बाद के एक नये स्कूल में अध्यापक बने । सन् 1934 ई० में इस पद को
छोड़कर सीतामढ़ी में सब - रजिस्ट्रार बने । सन् 1950 ई० में बिहार सरकार ने इन्हें मुजफ्फरपुर के
स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिन्दी - विभागाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया । सन् 1952 ई० से सन् 1963 ई० तक ये राज्यसभा के
सदस्य मनोनीत किये गये ।
इन्हें केन्द्रीय सरकार की हिन्दी - समिति का
परामर्शदाता भी । बनाया गया । सन् 1964 ई० में ये भागलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति बने । दिनकर जी को
कवि - रूप में पर्याप्त सम्मान मिला । ' पद्मभूषण ' की उपाधि, ' साहित्य अकादमी ' पुरस्कार द्विवेदी पदक डी०लिट० की
मानद उपाधि , राज्यसभा
की सदस्यता आदि इनके कृतित्व की राष्ट्र द्वारा स्वीकृति के
प्रमाण हा सन् 1972 ई०
में इन्हें उर्वशी के लिए ज्ञानपीठ
पुरस्कार ' से भी सम्मानित किया गया । इनका स्वर्गवास
24 अप्रैल , 1974 ई० ( संवत्
2031 वि० ) का मद्रास ( चेन्नई ) में हुआ ।
साहित्यिक सेवाएँ- दिनकर जी की सबसे प्रमुख विशेषता उनकी
परिवर्तनकारी सोच रही है । उनकी कविता का उद्भव छायावाद युग में हुआ और वह
प्रगतिवाद , प्रयोगवाद , नयी
कविता आदि के युगों से होकर गुजरी । इस दीर्घकाल में जो आरम्भ से अन्त तक उनके
काव्य में रही , वह है उनका राष्ट्रीय स्वर । ' दिनकर ' जी राष्ट्रीय भावनाओं के ओजस्वी गायक रहे
हैं । इन्होंने देशानुराग की भावना से ओत - प्रोत , पीड़ितों
के प्रति सहानुभूति की भावना से परिपूर्ण तथा क्रान्ति की भावना जगाने वाली रचनाएँ
लिखी हैं । ये लोक के प्रति निष्ठावान , सामाजिक दायित्व के
प्रति सजग तथा जनसाधारण के प्रति समर्पित कवि रहे हैं ।
कृतियाँ- दिनकर जी का साहित्य विपुल है , जिसमें काव्य के अतिरिक्त विविध - विषयक गद्य - रचनाएँ भी है । इनकी
प्रमुख काव्य - रचनाएँ निम्नलिखित है ।
रचनाएँ-
1 . रेणुका , 2 . हुंकार , 3 . कुरुक्षेत्र तथा 4 . उर्वशी है ।
इनके अतिरिक्त दिनकर जी के अन्य काव्यग्रन्थ
निम्नलिखित है
5 . खण्डकाव्य - रश्मिरथी ,
6 . कविता - संग्रह
- ( i ) रसवन्ती , ( ii ) द्वन्द्वगीत . ( iii ) सामधेनी
, ( iv ) बापू , ( v ) इतिहास के ऑसू ,
( vi) धूप और
धुआँ ,
( vii ) नीम के पत्ते , ( viii ) नीलकुसम ( ix
) चक्रवाल , ( x ) कविश्री
( xi ) सीपी और शंख
( xii ) परशुराम की प्रतीक्षा , ( xiii ) स्मृति - तिलक , ( xiv ) हारे
को हरिनाम आदि ,
7 . बाल - साहित्य - धूप - छाँह , मिर्च का मजा , सूरज का ब्याह ।
साहित्य में स्थान- दिनकर जी की सबसे बड़ी
विशेषता है , उनका समय के ' साथ
निरन्तर गतिशील रहना । यह उनके क्रान्तिकारी व्यक्तित्व आर ज्वलन्त प्रतिभा का
परिचायक है । फलत : गुप्त जी के बाद ये ही राष्ट्रकवि पदे के सच्चे अधिकारी बने और
इन्हें ' युग
- चरण ' , ' राष्ट्रीय - चेतना का वैतालिक ' और ' जन - जागरण का
अग्रदूत ' जैसे विशेषणों से विभूषित किया गया । ये
हिन्दी के गौरव हैं , जिन्हें पाकर सचमुच हिन्दी कविता धन्य
हई ।
