जीवन परिचय- राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गप्त
का जन्म संवत् 1943 वि० ( सन् 1886 ई० )
में ,
चिरगाँव ( जिला
झाँसी ) में हुआ था । इनके पिता का नाम सेठ रामचरण गुप्त था । सेठ
रामचरण गुप्त स्वयं एक अच्छे कवि थे । गुप्त जी पर अपने पिता का पूर्ण प्रभाव पड़ा
। आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी से भी इन्हें बहुत प्रेरणा मिली । ये द्विवेदी जी
को अपना गुरु मानते थे । गुप्त जी को प्रारम्भ में अंग्रेजी पढ़ने के लिए झाँसी
भेजा गया, किन्तु वहाँ इनका मन न लगा । अत: घर पर ही इनकी
शिक्षा का प्रबन्ध किया गया , जहाँ इन्होंने अंग्रेजी,
संस्कृत और हिन्दी का अध्ययन किया । गुप्त जी बड़े ही विनम्र ,
हँसमुख और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे । इनके काव्य में भारतीय
संस्कृति का प्रेरणाप्रद चित्रण हुआ है । इन्होंने अपनी कविताओं द्वारा राष्ट्र
में जागृति तो उत्पन्न की ही , साथ ही सक्रिय रूप से असहयोग
आन्दोलनों में भी भाग लेते रहे , जिसके फलस्वरूप इन्हें जेल
भी जाना पड़ा । ' साकेत ' महाकाव्य पर इन्हें
हिन्दी - साहित्य - सम्मेलन , प्रयाग से
मंगलाप्रसाद पारितोषिक भी मिला ।
भारत
सरकार ने गुप्त जी को इनकी साहित्य - सेवा के लिए पद्मभूषण से - सम्मानित किया और
राज्यसभा का सदस्य भी मनोनीत किया । जीवन के अन्तिम क्षणों तक ये निरन्तर साहित्य
- सृजन करते रहे । 12 दिसम्बर , 1964ई० (संवत् 2021
वि०) को माँ - भारती का यह महान् साधक पञ्चतत्त्व
में विलीन हो गया ।
साहित्यिक सेवाएँ- गुप्त जी का झुकाव
गीतिकाव्य की ओर था और राष्ट्रप्रेम । इनकी कविता का प्रमुख स्वर रहा । इनके काव्य
में भारतीय संस्कृति का प्रेरणाप्रद चित्रण हुआ है । इन्होंने अपनी कविताओं द्वारा
राष्ट्र में जागृति तो उत्पन्न की ही । साथ ही सक्रिय रूप से असहयोग आन्दोलनों में
भी भाग लेते रहे, जिसके फलस्वरूप इन्हें जेल भी
जाना पड़ा । ' साकेत ' महाकाव्य पर इन्हें हिन्दी - साहित्य
सम्मेलन , प्रयाग से मंगलाप्रसाद पारितोषिक भी मिला । भारत सरकार ने
गुप्त जी को इनकी साहित्य - सेवा के लिए पदमभूषण से सम्मानित - किया और राज्यसभा का सदस्य भी
मनोनीत किया ।
रचनाएँ -
गुप्त जी की समस्त रचनाएँ
दो प्रकार की हैं - (1) अनूदित तथा (2) मौलिक ।
इनकी
अनूदित रचनाओं में दो प्रकार का साहित्य है - कुछ काव्य और कुछ नाटक । इन अनूदित
ग्रन्थों में संस्कृत के यशस्वी नाटककार भास के स्वप्नवासवदत्ता ' का अनुवाद उल्लेखनीय है । ' वीरांगना ' , ' मेघनाद - वध ' , ' वृत्र - संहार ' आदि इनकी अन्य अनूदित रचनाएँ हैं । इनकी प्रमुख मौलिक काव्य - रचनाएँ निम्नवत् हैं ।
साकेत- यह उत्कृष्ट महाकाव्य है , जो ' श्रीरामचरितमानस ' के बाद
राम - काव्य का प्रमुख स्तम्भ है । भारत-भारती - इसमें भारत की दिव्य संस्कृति और गौरव का गान
किया गया है ।
यशोधरा- इसमें बुद्ध की पत्नी यशोधरा के चरित्र
को उजागर किया गया है । द्वापर
, जयभारत , विष्णुप्रिया - इनमें हिन्दू संस्कृति के
प्रमुख पात्रों के चरित्र का । पुनरावलोकन कर कवि ने अपनी पुनर्निर्माण कला
उत्कृष्ट रूप में प्रदर्शित की है । गुप्त जी की अन्य प्रमुख काव्य - रचनाएँ इस प्रकार हैं - रंग में
भंग , जयद्रथ
वध , किसान , पंचवटी , हिन्दू , सैरिन्ध्री , सिद्धराज
, नहुष , हिडिम्बा , त्रिपथगा , काबा और कर्बला , गुरुकुल
, वैतालिक , मंगल घट , अजित आदि । " अनघ ' , ' तिलोत्तमा ' , '
चन्द्रहास ' नामक तीन छोटे - छोटे पद्यबद्ध
रूपक भी इन्होंने लिखे हैं ।
साहित्य में स्थान- राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त
आधुनिक हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि रहे हैं । खड़ी बोली को काव्य के साँचे
में ढालकर परिष्कृत करने का जो असाधारण कौशल इन्होंने दिखाया , वह अविस्मरणीय रहेगा । इन्होंने राष्ट्र को जगाया और उसकी चेतना को वाणी
दी है । ये भारतीय संस्कृति के यशस्वी उद्गाता एवं परम वैष्णव होते हुए भी विश्व -
बन्धुत्व की भावना से ओत - प्रोत थे । ये सच्चे अर्थों में इस राष्ट्र के महनीय
मूल्यों के प्रतीक और आधुनिक भारत के । सच्चे राष्ट्रकवि थे ।
